Thursday, September 14, 2017

जन्मदिन मुबारक हो !!

ओह मेरी मातृभाषा
तुम कितनी शांत सी हो
निर्मल सी
कटुता की भाषा तुम्हे आती नहीं
दिल भर जाता है
जब कोई खुद के लफ़्ज़ों में
तुम्हे पिरोता है
जब कोई खुद को
बयां करता है
फिर भी आज की समझ कुछ
अजब सी है
शायद किसी को याद भी नहीं
कि  आज तुम्हारा दिन है
अपनी मातृभाषा का जन्मदिन है
कहने को हम सब कुछ याद रखतें हैं
सारे दिवस मनातें  है
तो आज हम तुम्हारा दिन कैसे भूल गए
मुबारक हो तुमको ये दिन ये साल
मुबारक हो तुमको तुम्हारी पहचान!!


Friday, September 08, 2017

पिछले साल की बारिश ...

पिछले साल की बारिश
कुछ ऐसी कसक छोड़ गई
तुम्हारी वो पहली नज़र
अपना असर छोड़ गई..
हमारे मिलने का सिलसिला
अब भी जारी है...
वो पहली मुलाकात
अपनी महक छोड़ गई !!




Friday, May 12, 2017

कभी तुझसे कोई...

कभी तुझसे कोई शिकायत नहीं की 
बिना मिले ही तुझसे सारी बातें की 
नहीं जानती कि कभी कुछ कहना भी चाहा था 
पर तुझसे मिलने की कभी हिमाकत नहीं की 
माना कि क़िस्मत का खेल बहुत ही अनोखा है 
हाँ मुझे तेरी किस्मत से मिलना तो है 
शायद उसी के भरोसे मैं कुछ कह पाऊं 
और तू कुछ समझ पाए... 
वक़्त बेवक़्त का यूँ  ख्यालों में आना तेरा 
मुझे कभी - कभी गुमराह कर जाता है 
रही बात मुकद्दर की तो मैं नहीं जानती 
लकीरों का क्या है वो तो हर हाँथ में होती हैं
इनके भरोसे हम किस्मत नहीं छोड़ सकते 
और फिर इनसे मुक़द्दर नहीं बदलते !!


Monday, April 03, 2017

ख्वाबों की दुनिया...

ख्वाबों की दुनिया हर कोई बनाता है 
जिसमें उम्मीदों की पेंगें भरता  है 
सारे पहलुओ को हम दरकिनार कर 
उड़ना चाहतें हैं खुले आसमाँ  में 
शायद ये उम्मीद नाम ही है 
टूटने का.... 
कोई न कोई खड़ा रहता है 
हमारे पर कुतरने को 
और शायद मन ही मन 
मुस्कुराता है ओ शक्स 
अपनी झूठी  जीत पर 
पर शायद ये नहीं जानता ओ 
कि कुदरत सब देख रही है 
उस इंसान की चली हुई 
हर चाल का जवाब मिलेगा 
और उस वक़्त कोई आँसू  
पोंछने वाला भी पास न होगा 
संभल जाओ ऐ एहसानमंदों 
लगा लो लगाम अपनी आदतों पे 
वरना वक़्त की मार से 
उबर न पाओगे 
कुछ कहना भी चाहोगे 
तो तड़प के रह जाओगे!!!

Wednesday, March 08, 2017

हाँ मुझे फ़क्र है ...

हाँ मुझे फ़क्र है
खुद के आस्तित्व पे
गुरूर है...
खुद के वज़ूद पे
घमंड है उस जननी पे
जिसने इस दुनिया में
लाने का हौंसला दिखाया
और अपने आँचल की
छाँव में रखकर...
इस ज़माने से बचाया
शुक्रिया अदा करती हूँ
उस जननी को
जिसने आंधी बनकर
मेरे आस्तित्व को बचाया
हाँ ख़ुश  हूँ मैं...
कि हे जननी तूने मुझे
नारीत्व का एहसास कराया !!

Thursday, March 02, 2017

ज़िन्दगी और वक़्त...

ज़िन्दगी और वक़्त
रेत  जैसे ही तो हैं
जितना कोशिश करो
मुठ्ठी में बांधने की
उतनी तेज़ी से
फिसलते हैं !!!


Friday, January 20, 2017

मिट्टी में खेलते हुए सपने देखें हैं मैंने ...





मिट्टी में खेलते हुए सपने देखें हैं मैंने 
इन नन्हें हांथों की लकीरें देखीं हैं मैंने 
कितना प्यारा है ये बचपन 
जहाँ न कल की कोई फिक्र है 
न ही आज की कोई चिंता 
बस मासूमियत से 
भरे ये चेहरे 
हँसी से खिलखिलाते हुए 
इन नन्हें क़दमों की 
आहट भी कितनी प्यारी है 
बिना किसी छल के 
चले जा रहें हैं 
हाँ इन मुस्कुराते हुए 
चेहरे की लाली देखी है मैंने 
मिट्टी में खेलती हुई 
ज़िन्दगी देखी है मैंने !!

Tuesday, January 17, 2017

ये जो पल बिताएं हैं ...



ये जो पल बिताएं हैं 
हमने साथ मिलके,  
खट्टी मीठी सी यादें 
बनकर रह जाएंगे !
बस कुछ यादों में सिमट जाएंगे 
और कुछ बातों में,
सम्भाल के रखना चाहो 
तो बंद कर लेना मुठ्ठी  में !
वरना धूप  में ओस 
की तरह गुम हो जाएंगे !!




Monday, December 19, 2016

कब्र खोदने से सुकून नहीं मिलता ....

कब्र खोदने से सुकून नहीं मिलता 
न ही ज़िन्दगी की खोई हुई वो शाम !

खुद को बदलने के लिए हौंसला ही काफी है 
मिलता नहीं मांगने से वो आसमाँ !

फ़रिश्ते हमें मिलते नहीं यूँ ही 
न ही मिलता है ज़िन्दगी का वो एहसास !

काश कि  ऐसा होता काश कि  वैसा होता 
उम्मीदों का ताना बाना कुछ ऐसा ही होता है !

जो मिलें हैं ये पल नसीब से 
वो कुछ तुम्हारे हैं और कुछ हमारे !

न डालो फ़िक्र की राख अब तुम इनपे 
कि अब वक़्त नहीं है फिर धूमिल होने का !!

Monday, December 05, 2016

कल रात चाँद से कुछ गुफ़्तुगू की...

कल रात चाँद से कुछ गुफ़्तुगू की
तुम्हारे रूठे होने की शिकायत की
तो हँस के चाँद ने कहा....
मिला है तुझे दोस्त तेरे ही जैसा
जिसे रूठने मानाने का खेल
बखूबी आता है
जा के उसी से पूछ ले
कि उसके मन में क्या छुपा है
कहीं सच में दिल को कुछ चुभा है
या वो तुझे परेशां करके यूँही हंस रहा है !!